जात को लात या प्यार का भस्मीभूत?

The Hindi Mail

यह एक सच्ची घटना पर आधारित प्रेम कहानी है। जो दर्शाती है कि प्यार के लिए एक प्रेमी कैसे अपने प्रेम का जीतांजली देते हैं और समाज, जात-पात कैसे इसके लिए बाधा बनते हैं? तो चलिए शुरुआत करते हैं।

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एक रामूभैया ब्रजकिशोर चाचा की बिटिया से छुप-छुपकर बहुते बतियाते थें। दोनों को एक दूसरे से प्यार होई गया।

कुछ साल बाद उन्हें लगा कि अब हमका शादी करी लेवे के चाही, लेकिन समस्या विकराल थी। लेकिन बात घुमा फिराकर यही था कि तुमरी जात अलग है।

वे बिहार के ऐसे गांव से थें जहां इनके घरवालों तो क्या पूरा गांव भी ऐसा सपने में भी नहीं सोचना चाहते हैं।

अगर ऐसा दुस्साहस कर लिये तो सोच लो भैया गंजे करके, मुंह में कालीख पोतकर जूते-चप्पल की बढ़िया सा माला पहिनाकर ढोल के साथ पूरे गाँव में बारात निकाली जाएगी।

एक और खास बात भैयाजी कि, यहां के सरपंचजी…

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