महज आकर्षक ही नहीं मैं : नारी

The Hindi Mail

अरे जल्दी करो। ओह ! बाल भी ढ़ंग से नहीं झारी। बिंदी तो ढ़ंग का लगा लेती। चेहरा देखो! मैनें पहले ही कही थी, कोई अच्छी साड़ी पहनना तो ये सलवार-कमीज पहेन ली। अब बस भी करो मां, क्यूँ जरूरी है मुझे आकर्षक लगना? वैसे भी एक साड़ी पहनकर महारानी नहीं बन जाऊँगी। बकवास बंद करो और सीधा चलो। हाँ, एक बात का ध्यान रखना, लड़के वाले जो पूछें सीर्फ उसी का जवाब देना, ज्यादा बकर-बकर मत करना, और नजर थोड़ा नीचे रखना।

बेचारी सरिता कर भी क्या सकती है सदियों से यही तो सिखती आयी है कि उसे पुरूष की तरह सोचना चाहिए, और एक भद्र महिला की तरफ व्यवहार करना चाहिए लेकिन एक युवती सा दिखना चाहिए।

एक स्वतंत्र सोच रखने वाले व्यक्ति के तौर पर अपना आत्म विकास कर पाने के अवसर या उनका दबावमुक्त चयन स्त्री के लिए एक बेहद मुश्किल काम है। सम्भवतः इसी द्वंद्व…

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