मुझे नहीं पड़ना तुम्हारी बातों में

The Hindi Mail

Image credit: shutter stock

इस सुनसान सड़क पर,

तुम जा रही होती हो, ऊंट की चाल में

लगता है, तुम पलटकर देखना चाहती हो

धूप तेज निकल पड़े

पांव नहीं पकते तेरे

___

ओह!

अरगनी पर भूल आया कपड़े मैनें

कोई खींचे ना जोर से, सुतली कमजोर है

कुछ भी उधार नहीं रखा है मैंने

फिर क्यों नहीं ठहर जाती, कुछ रोज और

अच्छा जाने दो, तुमने बताया नहीं,

तुम आज भी लिखती हो, अपनी टूटी पेंसिल से

___

बकवास बंद करो, मुझे बिल्कुल पसंद नहीं तुम्हारी बातें

मुझे ढूंढते हुए, इस तरह

तुम्हें मेरी कविताओं में नहीं आना चाहिए था

ताक-झांक की आदत नहीं गई तुम्हारी

___

धूप बहुत तेज है, बदनाम करते हुए गला भी सूख गया होगा

ठहर लो जरा, दो घूंट गन्ने का जूस पी लेते हैं

मैं केह रहा हूं इतनी तेज मत चलो

थोड़ा छांव हो जाने दो

………………

मुझे तुम्हारी आवाज नहीं आ…

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